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    कार्यशालाएँ एवं प्रशिक्षण

    शिक्षकों के लिए केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में सतत व्यावसायिक विकास (CPD)

    केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में सतत व्यावसायिक विकास (CPD) से आशय ऐसे संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से है, जिनका उद्देश्य शिक्षकों के व्यावसायिक ज्ञान, शिक्षणशास्त्रीय कौशल और व्यक्तिगत दक्षताओं को विकसित करना है। ये कार्यक्रम बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप बनाए गए हैं।

    KVS में CPD के उद्देश्य

      • समकालीन शिक्षण-अधिगम आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शिक्षकों के ज्ञान और कौशल का उन्नयन करना।
      • दक्षता-आधारित तथा अनुभवात्मक अधिगम जैसी NEP 2020 की सुधारात्मक पहलों को लागू करना।
      • डिजिटल बोर्ड, AI और कोडिंग सहित ICT के एकीकरण को बढ़ावा देना।
      • आलोचनात्मक चिंतन, सृजनात्मकता, सहयोग और संचार जैसे 21वीं सदी के कौशल विकसित करना।
      • नेतृत्व, संचार और भावनात्मक बुद्धिमत्ता के माध्यम से व्यक्तिगत विकास को बढ़ावा देना।
      • प्रभावी शिक्षणशास्त्र और मूल्यांकन प्रक्रियाओं के माध्यम से विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों में सुधार करना।

    प्रमुख प्रशिक्षण क्षेत्र

    1. शिक्षणशास्त्र कार्यशालाएँ: नवीन शिक्षण पद्धतियाँ, पाठ योजना और विभेदित शिक्षण।
    2. कक्षा प्रबंधन प्रशिक्षण: प्रभावी कक्षा नियंत्रण, व्यवहार प्रबंधन और संघर्ष समाधान की तकनीकें।
    3. प्रौद्योगिकी एकीकरण कार्यशालाएँ: डिजिटल साक्षरता बढ़ाना और कक्षा शिक्षण में प्रौद्योगिकी का एकीकरण।
    4. मूल्यांकन एवं प्रतिपुष्टि प्रशिक्षण: मूल्यांकन तैयार करना, रचनात्मक प्रतिपुष्टि देना और सुधार के लिए आँकड़ों का उपयोग करना।
    5. विशेष शिक्षा एवं समावेशी शिक्षण: विविध शिक्षार्थियों को सहयोग देने तथा समावेशी कक्षाएँ बनाने की रणनीतियाँ।
    6. सांस्कृतिक दक्षता प्रशिक्षण: विविधता को बढ़ावा देना, सांस्कृतिक भिन्नताओं को समझना और समावेशी शिक्षण पद्धतियाँ अपनाना।
    7. सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम (SEL): विद्यार्थियों के भावनात्मक कल्याण, लचीलापन और सकारात्मक कक्षा संस्कृति का विकास करना।

    CPD कार्यक्रमों की प्रमुख विशेषताएँ

    • संरचित प्रशिक्षण मॉड्यूल: KVS मुख्यालय द्वारा NCERT, CBSE, NVS और अन्य संस्थानों के सहयोग से विकसित।
    • मिश्रित अधिगम दृष्टिकोण: ऑफलाइन कार्यशालाओं, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और स्व-अध्ययन आधारित अधिगम का संयोजन।
    • दक्षता-आधारित प्रशिक्षण: कक्षा में व्यावहारिक अनुप्रयोग पर ध्यान।
    • विषय-विशिष्ट कार्यक्रम: PGT, TGT, PRT और विशेष शिक्षकों के लिए अनुकूलित।
    • मूल्यांकन एवं प्रतिपुष्टि: असाइनमेंट, क्विज़ और परियोजनाओं के माध्यम से मूल्यांकन।

    KVS द्वारा उपयोग किए जाने वाले प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म

    • DIKSHA पोर्टल: ऑनलाइन पाठ्यक्रम और डिजिटल संसाधन।
    • NISHTHA मॉड्यूल: NEP 2020 के अनुरूप क्षमता-वर्धन कार्यक्रम।
    • KVS क्षेत्रीय संस्थान: व्यावहारिक प्रशिक्षण और कार्यशालाएँ।
    • वेबिनार एवं वर्चुअल कक्षाएँ: ज्ञान के समयबद्ध प्रसार के लिए।

    हाल के प्रमुख फोकस क्षेत्र

    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और कोडिंग का एकीकरण।
    • दक्षता-आधारित मूल्यांकन और प्रश्नपत्र निर्माण।
    • समावेशी शिक्षा और विशेष आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों के लिए सहयोग।
    • अनुभवात्मक और गतिविधि-आधारित अधिगम दृष्टिकोण।
    • डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा जागरूकता।

    शिक्षकों पर CPD का प्रभाव

    • पाठ योजना और विद्यार्थी सहभागिता में सुधार।
    • प्रौद्योगिकी के उपयोग में आत्मविश्वास में वृद्धि।
    • दक्षता-आधारित मूल्यांकन की बेहतर समझ।
    • संसाधन-समृद्ध कक्षाओं का विकास।
    • शिक्षक नेतृत्व और मेंटरिंग कौशल का विकास।

    KVS में वार्षिक CPD चक्र

    • प्रतिपुष्टि और कार्य-प्रदर्शन विश्लेषण के माध्यम से प्रशिक्षण आवश्यकताओं की पहचान।
    • KVS मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार करना।
    • ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कार्यान्वयन।
    • क्विज़, असाइनमेंट और प्रदर्शन पाठों के माध्यम से मूल्यांकन।
    • कक्षा में प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए अनुवर्ती मार्गदर्शन।

    समग्र रूप से, KVS में CPD शिक्षकों की दक्षताओं को सुदृढ़ करने तथा राष्ट्रीय शैक्षिक प्राथमिकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


    पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नारायणपुर में आयोजित सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशालाएँ (सत्र 2026-27)

    शिक्षा संहिता के अनुच्छेद 59 पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

    विषय: शिक्षा संहिता का अनुच्छेद 59

    दिनांक: 31 अगस्त 2026

    संसाधन व्यक्ति: श्री रवि शंकर यादव, प्रभारी प्राचार्य

    “शिक्षा संहिता के अनुच्छेद 59” विषय पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम 31 अगस्त 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। सत्र का संचालन श्री रवि शंकर यादव, प्रभारी प्राचार्य द्वारा किया गया।

    शिक्षा संहिता के अनुच्छेद 59 पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

    प्रशिक्षण के उद्देश्य

    • प्रतिभागियों को शिक्षा संहिता के अनुच्छेद 59 के प्रावधानों से परिचित कराना।
    • अनुच्छेद 59 से संबंधित नियमों, प्रक्रियाओं और संस्थागत उत्तरदायित्वों की समझ विकसित करना।
    • प्रावधानों के व्यावहारिक अनुप्रयोग और विद्यालयी प्रशासन में उनके प्रभाव को स्पष्ट करना।
    • नियमों के प्रभावी अनुपालन तथा उचित अभिलेखीय एवं प्रशासनिक कार्यवाही के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    श्री रवि शंकर यादव ने शिक्षा संहिता के अनुच्छेद 59 से संबंधित प्रमुख प्रावधानों और उनके व्यावहारिक महत्त्व पर प्रकाश डाला। सत्र में संबंधित नियमों को विद्यालयी प्रशासन एवं दैनिक कार्यप्रणाली के संदर्भ में समझाने पर जोर दिया गया।

    प्रशिक्षण के दौरान अनुच्छेद 59 के अंतर्गत आने वाले प्रशासनिक पहलुओं, संबंधित प्रक्रियाओं तथा कर्मचारियों द्वारा नियमों के उचित अनुपालन की आवश्यकता पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों को नियमों की स्पष्ट समझ विकसित करने तथा कार्यस्थल पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक सावधानियों से अवगत कराया गया।

    सहभागिता एवं संवाद

    शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रतिभागियों ने अनुच्छेद 59 के प्रावधानों, उनके व्यावहारिक अनुप्रयोग तथा विद्यालयी प्रशासन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर प्रश्न पूछे। संवादात्मक चर्चा के माध्यम से प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया गया।

    प्रशिक्षण का परिणाम

    • शिक्षा संहिता के अनुच्छेद 59 के प्रावधानों की समझ में वृद्धि हुई।
    • संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं और उत्तरदायित्वों के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • नियमों के व्यावहारिक अनुप्रयोग और अनुपालन के महत्त्व की स्पष्टता हुई।
    • विद्यालयी कार्यप्रणाली में नियमों के प्रभावी पालन के लिए कर्मचारियों को प्रेरणा मिली।

    निष्कर्ष

    यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक रहा। इसने शिक्षा संहिता के अनुच्छेद 59 के प्रावधानों की समझ को सुदृढ़ किया तथा विद्यालयी प्रशासन में नियमों के प्रभावी अनुपालन और उचित कार्यप्रणाली के महत्त्व को रेखांकित किया।


    खिलौना-आधारित शिक्षणशास्त्र पर CPD कार्यशाला

    विषय: सदन-आधारित शिक्षणशास्त्र

    “सदन-आधारित शिक्षणशास्त्र” विषय पर एक सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशाला 29 अप्रैल 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सत्र का संचालन श्री आशीष भालेराव, PRT द्वारा किया गया।

    खिलौना-आधारित शिक्षणशास्त्र पर CPD कार्यशाला

    कार्यशाला के उद्देश्य

    • शिक्षकों को विद्यालयी शिक्षा में सदन-आधारित शिक्षणशास्त्र की अवधारणा और महत्त्व से परिचित कराना।
    • विद्यार्थियों में आनंदमय, अनुभवात्मक और गतिविधि-आधारित अधिगम को बढ़ावा देना।
    • शिक्षकों को खिलौनों और खेल सामग्री का कक्षा शिक्षण में प्रभावी उपयोग करने में सक्षम बनाना।
    • कक्षा-व्यवहार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की अनुशंसाओं के अनुरूप करना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    श्री आशीष भालेराव ने अधिगम को विद्यार्थियों के लिए रोचक, संवादात्मक और आनंददायक बनाने में खिलौना-आधारित शिक्षणशास्त्र के महत्त्व पर प्रकाश डाला। सत्र में खिलौनों के माध्यम से अवधारणात्मक समझ, सृजनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन और समस्या-समाधान क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया।

    संसाधन व्यक्ति ने बताया कि स्थानीय एवं स्वदेशी खिलौनों को कक्षा शिक्षण में प्रभावी रूप से शामिल करके अनुभवात्मक अधिगम को बढ़ावा दिया जा सकता है। कार्यशाला में विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने और समग्र विकास के लिए खेल-आधारित रणनीतियों पर भी चर्चा की गई।

    सहभागिता एवं संवाद

    शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों में खिलौना-आधारित गतिविधियों को शामिल करने संबंधी विचार साझा किए। संवादात्मक सत्र ने शिक्षकों को रचनात्मक शिक्षण-अधिगम पद्धतियों का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।

    कार्यशाला का परिणाम

    • सदन-आधारित शिक्षणशास्त्र के सिद्धांतों और लाभों की बेहतर समझ विकसित हुई।
    • अनुभवात्मक और खेल-आधारित अधिगम रणनीतियों के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • कक्षा शिक्षण में खिलौनों और गतिविधियों को शामिल करने के लिए शिक्षकों की प्रेरणा बढ़ी।
    • नवीन और शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिला।

    निष्कर्ष

    यह CPD कार्यशाला सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक रही। इसने आनंदमय एवं अनुभवात्मक अधिगम के महत्त्व को रेखांकित किया तथा विद्यार्थियों की सहभागिता और अधिगम परिणामों को बेहतर बनाने के लिए नवीन शिक्षणशास्त्रीय दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।


    जादुई पिटारा पर CPD कार्यशाला

    विषय: जादुई पिटारा

    “जादुई पिटारा” विषय पर एक सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशाला 28 अप्रैल 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सत्र का संचालन सुश्री करिश्मा शुक्ला, PRT द्वारा किया गया।

    जादुई पिटारा पर CPD कार्यशाला

    कार्यशाला के उद्देश्य

    • शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अंतर्गत परिकल्पित जादुई पिटारा की अवधारणा और महत्त्व से परिचित कराना।
    • बुनियादी अवस्था में आनंदमय, खेल-आधारित और गतिविधि-उन्मुख अधिगम को बढ़ावा देना।
    • शिक्षकों को कक्षा शिक्षण में जादुई पिटारा के संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने में सक्षम बनाना।
    • नवीन और बाल-केंद्रित शिक्षणशास्त्रीय पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    सुश्री करिश्मा शुक्ला ने बुनियादी अवस्था के लिए NCERT द्वारा विकसित नवीन खेल-आधारित अधिगम संसाधन जादुई पिटारा के महत्त्व पर प्रकाश डाला। कहानियों, खिलौनों, खेलों, पहेलियों, कठपुतलियों और गतिविधि-आधारित सामग्री के माध्यम से छोटे बच्चों के लिए अधिगम को आनंदमय, रोचक और सार्थक बनाने पर जोर दिया गया।

    संसाधन व्यक्ति ने जादुई पिटारा के विभिन्न घटकों का प्रदर्शन किया और बताया कि इन्हें अनुभवात्मक अधिगम, सृजनात्मकता, संचार कौशल और बच्चों के समग्र विकास के लिए कक्षा में कैसे एकीकृत किया जा सकता है। NEP 2020 और निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों के साथ इसके सामंजस्य पर भी चर्चा हुई।

    सहभागिता एवं संवाद

    कार्यशाला में शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों ने जादुई पिटारा के संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर चर्चा की और अपने विचार साझा किए। प्रदर्शन एवं संवादात्मक गतिविधियों ने सत्र को अत्यंत रोचक और उपयोगी बनाया।

    कार्यशाला का परिणाम

    • जादुई पिटारा के उद्देश्यों और घटकों की बेहतर समझ विकसित हुई।
    • खेल-आधारित और अनुभवात्मक अधिगम के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • कक्षा शिक्षण में जादुई पिटारा के संसाधनों को एकीकृत करने की शिक्षकों की क्षमता सुदृढ़ हुई।
    • आनंदमय और बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिला।

    निष्कर्ष

    यह CPD कार्यशाला सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी रही। इसने बुनियादी अवस्था में खेल-आधारित एवं अनुभवात्मक अधिगम के महत्त्व को रेखांकित किया तथा विद्यार्थियों के लिए समृद्ध और रोचक अधिगम अनुभव तैयार करने हेतु जादुई पिटारा के प्रभावी उपयोग के लिए प्रेरित किया।


    छुट्टी यात्रा रियायत (LTC) नियमों पर CPD कार्यशाला

    विषय: छुट्टी यात्रा रियायत (LTC) नियम

    “छुट्टी यात्रा रियायत (LTC) नियम” विषय पर एक सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशाला 29 अप्रैल 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सत्र का संचालन श्री महेश देवांगन, TGT गणित द्वारा किया गया।

    छुट्टी यात्रा रियायत (LTC) नियमों पर CPD कार्यशाला

    कार्यशाला के उद्देश्य

    • कर्मचारियों को छुट्टी यात्रा रियायत (LTC) से संबंधित प्रावधानों और दिशा-निर्देशों से परिचित कराना।
    • LTC के अंतर्गत पात्रता, हकदारी और स्वीकार्यता के संबंध में जागरूकता उत्पन्न करना।
    • LTC लेने और दावों को प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को स्पष्ट करना।
    • LTC लाभ का दावा करते समय नियमों का पालन करने और विसंगतियों से बचने में कर्मचारियों को सक्षम बनाना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    श्री महेश देवांगन ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू LTC के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी। सत्र में पात्रता मानदंड, LTC के प्रकार, गृह नगर एवं अखिल भारतीय LTC, ब्लॉक वर्ष तथा स्वीकार्य यात्रा सुविधाओं जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया।

    संसाधन व्यक्ति ने LTC के लिए आवेदन, अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से टिकट बुकिंग, दावे प्रस्तुत करने तथा प्रतिपूर्ति के लिए आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया समझाई। सुचारु निपटान के लिए सरकारी दिशा-निर्देशों के पालन और समय पर दावा प्रस्तुत करने पर जोर दिया।

    सहभागिता एवं संवाद

    शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रतिभागियों ने पात्रता, दावा प्रक्रिया और LTC नियमों में हाल के संशोधनों से संबंधित प्रश्न पूछे। संवादात्मक चर्चा से प्रावधानों की समझ स्पष्ट हुई।

    कार्यशाला का परिणाम

    • LTC के प्रावधानों और प्रक्रियाओं की बेहतर समझ विकसित हुई।
    • पात्रता शर्तों और स्वीकार्य सुविधाओं के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • दस्तावेजीकरण और दावा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया स्पष्ट हुई।
    • LTC लाभ लेते समय सरकारी नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहन मिला।

    निष्कर्ष

    यह CPD कार्यशाला सभी प्रतिभागियों के लिए उपयोगी रही। इसने LTC नियमों के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी तथा कर्मचारियों को सरकारी मानदंडों और प्रक्रियाओं के अनुसार LTC सुविधाओं को समझने और प्राप्त करने में सक्षम बनाया।


    टीमवर्क और नेतृत्व कौशल पर CPD कार्यशाला

    विषय: टीमवर्क और नेतृत्व कौशल

    “टीमवर्क और नेतृत्व कौशल” विषय पर एक सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशाला 28 अप्रैल 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सत्र का संचालन श्री शुभम गुप्ता, PRT द्वारा किया गया।

    टीमवर्क और नेतृत्व कौशल पर CPD कार्यशाला

    कार्यशाला के उद्देश्य

    • शैक्षणिक संस्थानों में टीमवर्क और नेतृत्व के महत्त्व को समझाना।
    • विद्यालयी वातावरण में प्रभावी कार्य के लिए शिक्षकों के सहयोगात्मक कौशल को बढ़ाना।
    • व्यावसायिक विकास और संस्थागत उन्नति के लिए आवश्यक नेतृत्व गुणों को सुदृढ़ करना।
    • विद्यालय में सकारात्मक और सहयोगात्मक कार्य संस्कृति को बढ़ावा देना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    श्री शुभम गुप्ता ने संस्थागत लक्ष्यों की प्राप्ति और विद्यालय के समग्र संचालन में टीमवर्क तथा प्रभावी नेतृत्व के महत्त्व पर प्रकाश डाला। प्रभावी नेतृत्व के लिए संचार, निर्णय-निर्माण, समस्या-समाधान, सहानुभूति और उत्तरदायित्व जैसे गुणों पर चर्चा की गई।

    संसाधन व्यक्ति ने मजबूत टीम बनाने, सहयोग बढ़ाने, संघर्षों का समाधान करने और सहयोगी कार्य वातावरण विकसित करने की विभिन्न रणनीतियाँ बताईं। साझा उत्तरदायित्व, पारस्परिक सम्मान और सामूहिक प्रयास के महत्त्व पर जोर दिया गया।

    सहभागिता एवं संवाद

    शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। संवादात्मक चर्चा, समूह गतिविधियों और अनुभव-साझाकरण ने कार्यक्रम को उपयोगी बनाया। प्रतिभागियों ने अपनी नेतृत्व भूमिकाओं पर विचार किया और विद्यालय में टीमवर्क को सुदृढ़ करने के उपाय खोजे।

    कार्यशाला का परिणाम

    • टीमवर्क और नेतृत्व के सिद्धांतों की बेहतर समझ विकसित हुई।
    • शिक्षकों के सहयोगात्मक और पारस्परिक कौशल में सुधार हुआ।
    • प्रभावी संचार और संघर्ष समाधान की रणनीतियों के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • सकारात्मक, सहयोगात्मक और उत्पादक कार्य वातावरण को बढ़ावा देने के लिए प्रेरणा मिली।

    निष्कर्ष

    यह CPD कार्यशाला सभी प्रतिभागियों के लिए ज्ञानवर्धक और उपयोगी रही। इसने संस्थागत लक्ष्यों की प्राप्ति में टीमवर्क और नेतृत्व के महत्त्व को रेखांकित किया तथा विद्यालय के समग्र विकास के लिए सहयोगात्मक कार्य पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।


    आपदा प्रबंधन और विद्यालय सुरक्षा पर CPD कार्यशाला

    विषय: आपदा प्रबंधन और विद्यालय सुरक्षा

    “आपदा प्रबंधन और विद्यालय सुरक्षा” विषय पर एक सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशाला 23 अप्रैल 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सत्र का संचालन श्रीमती संगीता महाता, PGT भूगोल द्वारा किया गया।

    आपदा प्रबंधन और विद्यालय सुरक्षा पर CPD कार्यशाला

    कार्यशाला के उद्देश्य

    • शिक्षकों में विभिन्न प्राकृतिक और मानव-जनित आपदाओं के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।
    • विद्यालयों में आपदा तैयारी और प्रतिक्रिया तंत्र से कर्मचारियों को परिचित कराना।
    • विद्यालय सुरक्षा उपायों और आपातकालीन प्रोटोकॉल की समझ विकसित करना।
    • विद्यालय समुदाय में सुरक्षा, तैयारी और लचीलापन की संस्कृति को बढ़ावा देना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    श्रीमती संगीता महाता ने शैक्षणिक संस्थानों में आपदा प्रबंधन के महत्त्व और आपातकालीन परिस्थितियों में जोखिम कम करने के लिए तैयारी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। भूकंप, बाढ़, आग, चक्रवात और अन्य आपदाओं पर चर्चा की गई।

    सत्र में निकासी प्रक्रिया, आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना, प्राथमिक उपचार तथा आपदा के दौरान शिक्षकों की भूमिकाओं और उत्तरदायित्वों पर चर्चा हुई। मॉक ड्रिल, आपातकालीन उपकरणों के रखरखाव और सुरक्षित अधिगम वातावरण पर भी जोर दिया गया।

    सहभागिता एवं संवाद

    शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की। संवादात्मक चर्चा और अनुभव-साझाकरण के माध्यम से विभिन्न आपदा परिस्थितियों और उचित प्रतिक्रिया रणनीतियों पर विचार किया गया। विद्यालय में सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई।

    कार्यशाला का परिणाम

    • आपदा तैयारी और जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • विद्यालय सुरक्षा प्रोटोकॉल और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रक्रियाओं की समझ में सुधार हुआ।
    • आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया देने की शिक्षकों की क्षमता सुदृढ़ हुई।
    • सुरक्षित और आपदा-रोधी विद्यालय वातावरण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन मिला।

    निष्कर्ष

    यह CPD कार्यशाला अत्यंत उपयोगी रही। इसने विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में आपदा तैयारी तथा विद्यालय सुरक्षा के महत्त्व को रेखांकित किया और सक्रिय सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया।


    राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कार्यान्वयन पर CPD कार्यशाला

    विषय: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का कार्यान्वयन

    “राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का कार्यान्वयन” विषय पर एक सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशाला 27 अप्रैल 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सत्र का संचालन श्री अभितेश जांगीर, PRT द्वारा किया गया।

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कार्यान्वयन पर CPD कार्यशाला

    कार्यशाला के उद्देश्य

    • शिक्षकों को NEP 2020 के प्रमुख प्रावधानों और दृष्टि से परिचित कराना।
    • रटने-आधारित अधिगम से दक्षता-आधारित शिक्षा की ओर परिवर्तन को समझना।
    • NEP 2020 के अनुरूप नवीन शिक्षणशास्त्रीय पद्धतियों का अध्ययन करना।
    • समग्र और बहुविषयक अधिगम दृष्टिकोण को बढ़ावा देना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    श्री अभितेश जांगीर ने NEP 2020 के अंतर्गत प्रमुख सुधारों की जानकारी दी तथा अनुभवात्मक अधिगम, आलोचनात्मक चिंतन और कौशल-आधारित शिक्षा के महत्त्व पर जोर दिया। 5+3+3+4 संरचना, शिक्षण में प्रौद्योगिकी के एकीकरण तथा आधारभूत साक्षरता और संख्याज्ञान पर भी चर्चा हुई।

    कार्यशाला में मूल्यांकन सुधारों, विशेषकर प्रारूपिक एवं दक्षता-आधारित मूल्यांकन की ओर परिवर्तन पर चर्चा की गई। शिक्षकों को शिक्षार्थी-केंद्रित पद्धतियाँ और डिजिटल उपकरण प्रभावी रूप से अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

    सहभागिता एवं संवाद

    शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रश्नोत्तर, संवाद और श्रेष्ठ प्रथाओं के साझा करने से सत्र उपयोगी रहा। प्रतिभागियों ने कक्षा में NEP 2020 के कार्यान्वयन की व्यावहारिक चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा की।

    कार्यशाला का परिणाम

    • NEP 2020 की बेहतर समझ विकसित हुई।
    • नवीन शिक्षण रणनीतियों के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • प्रौद्योगिकी-एकीकृत अधिगम को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिला।
    • दक्षता-आधारित शिक्षा पद्धतियों को लागू करने के लिए प्रेरणा मिली।

    निष्कर्ष

    यह CPD कार्यशाला अत्यंत ज्ञानवर्धक रही। इसने NEP 2020 के कार्यान्वयन की उपयोगी जानकारी दी और बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास के महत्त्व को रेखांकित किया।


    21वीं सदी के कौशल पर CPD कार्यशाला

    विषय: 21वीं सदी के कौशल

    “21वीं सदी के कौशल” विषय पर एक सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशाला 27 अप्रैल 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सत्र का संचालन श्रीमती चांदनी, PRT द्वारा किया गया।

    21वीं सदी के कौशल पर CPD कार्यशाला

    कार्यशाला के उद्देश्य

    • शिक्षकों को शिक्षा में 21वीं सदी के कौशल की अवधारणा और महत्त्व से परिचित कराना।
    • आलोचनात्मक चिंतन, सृजनात्मकता, सहयोग और संचार कौशल की समझ विकसित करना।
    • नवीन और शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देना।
    • इन कौशलों को कक्षा शिक्षण में एकीकृत करने की रणनीतियाँ प्रदान करना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    श्रीमती चांदनी ने भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए विद्यार्थियों को तैयार करने में 21वीं सदी के कौशल के महत्त्व पर प्रकाश डाला। सत्र में 4Cs—आलोचनात्मक चिंतन, सृजनात्मकता, सहयोग और संचार—पर विशेष जोर दिया गया।

    डिजिटल साक्षरता, समस्या-समाधान, नवाचार और जीवन कौशल को दैनिक कक्षा व्यवहार में शामिल करने के महत्त्व पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों में इन कौशलों को विकसित करने के लिए विभिन्न उदाहरण और रणनीतियाँ साझा की गईं।

    सहभागिता एवं संवाद

    सभी शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। संवादात्मक चर्चा, समूह गतिविधियों और अनुभव-साझाकरण ने कार्यक्रम को उपयोगी बनाया। प्रतिभागियों ने कक्षा में 21वीं सदी के कौशल लागू करने के व्यावहारिक उपायों पर विचार किया।

    कार्यशाला का परिणाम

    • शिक्षा में 21वीं सदी के कौशल के महत्त्व की समझ बढ़ी।
    • शिक्षार्थी-केंद्रित और नवीन शिक्षण पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • कक्षा गतिविधियों में आलोचनात्मक चिंतन और सृजनात्मकता को शामिल करने की समझ विकसित हुई।
    • सहयोगात्मक और प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षण को अपनाने के लिए प्रेरणा मिली।

    निष्कर्ष

    यह CPD कार्यशाला अत्यंत उपयोगी रही। इसने विद्यार्थियों में 21वीं सदी के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने के महत्त्व को रेखांकित किया और शिक्षकों को नवीन शिक्षण पद्धतियाँ अपनाने के लिए प्रेरित किया।


    लैंगिक संवेदनशीलता और कानूनी जागरूकता पर CPD कार्यशाला

    विषय: लैंगिक संवेदनशीलता एवं कानूनी जागरूकता

    “लैंगिक संवेदनशीलता एवं कानूनी जागरूकता” विषय पर एक सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशाला 25 अप्रैल 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सत्र का संचालन सुश्री ज्योति शर्मा, PRT द्वारा किया गया।

    लैंगिक संवेदनशीलता और कानूनी जागरूकता पर CPD कार्यशाला

    कार्यशाला के उद्देश्य

    • शैक्षणिक वातावरण में लैंगिक समानता और संवेदनशीलता के प्रति शिक्षकों में जागरूकता उत्पन्न करना।
    • सभी विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए समावेशी, सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण को बढ़ावा देना।
    • लैंगिक मुद्दों और अधिकारों की सुरक्षा से संबंधित कानूनी प्रावधानों से प्रतिभागियों को परिचित कराना।
    • विद्यालय में लैंगिक-संवेदनशील व्यवहार और नैतिक आचरण को प्रोत्साहित करना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    सुश्री ज्योति शर्मा ने समावेशी और समानतापूर्ण शैक्षिक वातावरण के निर्माण में लैंगिक संवेदनशीलता के महत्त्व पर प्रकाश डाला। लैंगिक रूढ़ियों को समाप्त करने, पारस्परिक सम्मान और सभी विद्यार्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

    सत्र में लैंगिक समानता, महिला अधिकार, बाल संरक्षण और कार्यस्थल सुरक्षा से संबंधित कानूनी प्रावधानों एवं नीतियों पर चर्चा हुई। भेदभाव, उत्पीड़न और पक्षपात की रोकथाम में शिक्षकों की जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया।

    सहभागिता एवं संवाद

    शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। संवाद, केस स्टडी और अनुभव-साझाकरण के माध्यम से प्रतिभागियों ने लैंगिक मुद्दों पर विचार किया और समावेशी वातावरण बनाने की रणनीतियों पर चर्चा की।

    कार्यशाला का परिणाम

    • लैंगिक संवेदनशीलता और इसके महत्त्व की समझ बढ़ी।
    • लैंगिक समानता और अधिकारों की सुरक्षा से संबंधित कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • सम्मानजनक और सुरक्षित विद्यालय वातावरण के प्रति प्रतिबद्धता सुदृढ़ हुई।
    • कक्षा और विद्यालय गतिविधियों में लैंगिक-संवेदनशील व्यवहार अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिला।

    निष्कर्ष

    यह CPD कार्यशाला अत्यंत उपयोगी रही। इसने लैंगिक समानता, कानूनी जागरूकता और नैतिक आचरण के महत्त्व को रेखांकित किया तथा सभी हितधारकों के लिए सुरक्षित, समावेशी और सहयोगी शैक्षिक वातावरण बनाने की दिशा में प्रेरित किया।


    एकीकृत अधिगम एवं बहुविषयक दृष्टिकोण पर CPD कार्यशाला

    विषय: एकीकृत अधिगम एवं बहुविषयक दृष्टिकोण

    “एकीकृत अधिगम एवं बहुविषयक दृष्टिकोण” विषय पर एक सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशाला 24 अप्रैल 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सत्र का संचालन श्रीमती रवीना, PRT द्वारा किया गया।

    एकीकृत अधिगम एवं बहुविषयक दृष्टिकोण पर CPD कार्यशाला

    कार्यशाला के उद्देश्य

    • NEP 2020 में परिकल्पित एकीकृत एवं बहुविषयक अधिगम की अवधारणा और महत्त्व से शिक्षकों को परिचित कराना।
    • विद्यार्थियों के लिए समग्र और परस्पर संबद्ध अधिगम अनुभवों को बढ़ावा देना।
    • विभिन्न विषयों की अवधारणाओं को एकीकृत करने वाले पाठ तैयार करने में शिक्षकों को सक्षम बनाना।
    • नवीन, अनुभवात्मक और शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों को प्रोत्साहित करना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    श्रीमती रवीना ने वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में ज्ञान की समझ और अनुप्रयोग को बढ़ाने में एकीकृत तथा बहुविषयक दृष्टिकोण के महत्त्व को समझाया। पारंपरिक विषय सीमाओं से आगे बढ़कर समग्र अधिगम अनुभव देने पर जोर दिया गया।

    परियोजना-आधारित अधिगम, विषयगत शिक्षण, अनुभवात्मक अधिगम और सहयोगात्मक गतिविधियों के माध्यम से विषयों के एकीकरण की रणनीतियों पर चर्चा हुई। बहुविषयक अधिगम से सृजनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान और गहरी अवधारणात्मक समझ विकसित होने की जानकारी दी गई।

    सहभागिता एवं संवाद

    शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों की अवधारणाओं को एकीकृत करने के लिए नवीन विचार साझा किए। संवादात्मक सत्र ने विद्यार्थियों के लिए सार्थक और रोचक अधिगम अनुभव तैयार करने में उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान की।

    कार्यशाला का परिणाम

    • एकीकृत और बहुविषयक शिक्षण-अधिगम दृष्टिकोण की समझ बढ़ी।
    • NEP 2020 की अनुशंसाओं को कक्षा व्यवहार में लागू करने के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • अंतरविषयक और अनुभवात्मक गतिविधियाँ तैयार करने की शिक्षकों की क्षमता सुदृढ़ हुई।
    • नवीन और समग्र शिक्षण पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिला।

    निष्कर्ष

    यह CPD कार्यशाला अत्यंत उपयोगी रही। इसने विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए एकीकृत और बहुविषयक अधिगम के महत्त्व को रेखांकित किया तथा NEP 2020 की दृष्टि के अनुरूप शिक्षार्थी-केंद्रित एवं अंतरविषयक शिक्षण अपनाने के लिए प्रेरित किया।


    समावेशी शिक्षा पर CPD कार्यशाला

    विषय: समावेशी शिक्षा

    “समावेशी शिक्षा” विषय पर एक सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशाला 23 अप्रैल 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सत्र का संचालन श्री कुमार शतकरनी, PRT द्वारा किया गया।

    समावेशी शिक्षा पर CPD कार्यशाला

    कार्यशाला के उद्देश्य

    • शिक्षकों को समावेशी शिक्षा की अवधारणा और सिद्धांतों से परिचित कराना।
    • विविध शिक्षार्थियों, विशेषकर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN), की शैक्षिक आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाना।
    • कक्षा में समानतापूर्ण और समावेशी शिक्षण-अधिगम पद्धतियों को बढ़ावा देना।
    • सहायक और शिक्षार्थी-अनुकूल कक्षा वातावरण बनाने की प्रभावी रणनीतियाँ प्रदान करना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    श्री कुमार शतकरनी ने सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि, क्षमताओं या अधिगम आवश्यकताओं की परवाह किए बिना सभी विद्यार्थियों के लिए समान अधिगम अवसर सुनिश्चित करने में समावेशी शिक्षा के महत्त्व पर प्रकाश डाला। NEP 2020 के समानतापूर्ण और समावेशी शिक्षा संबंधी दृष्टिकोण पर चर्चा की गई।

    विभेदित शिक्षण, लचीली शिक्षण पद्धतियों, कक्षा अनुकूलन और उपयुक्त शिक्षण-अधिगम सामग्री के उपयोग के माध्यम से विविध आवश्यकताओं को पूरा करने की रणनीतियाँ बताई गईं। कक्षा में सहानुभूति, स्वीकृति और विविधता के सम्मान पर भी जोर दिया गया।

    सहभागिता एवं संवाद

    शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की और समावेशी कक्षा व्यवहार से जुड़े अनुभव साझा किए। संवाद और प्रश्नोत्तर के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपने अनुभवों पर चर्चा की।

    कार्यशाला का परिणाम

    • समावेशी शिक्षा के सिद्धांतों और महत्त्व की समझ बढ़ी।
    • विविध शिक्षार्थियों और CwSN की शैक्षिक आवश्यकताओं के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • समावेशी शिक्षणशास्त्रीय पद्धतियों को अपनाने की शिक्षकों की क्षमता सुदृढ़ हुई।
    • सहायक, समानतापूर्ण और शिक्षार्थी-अनुकूल कक्षा वातावरण बनाने के लिए प्रोत्साहन मिला।

    निष्कर्ष

    यह CPD कार्यशाला अत्यंत उपयोगी रही। इसने सभी शिक्षार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुँच सुनिश्चित करने में समावेशी शिक्षा के महत्त्व को रेखांकित किया और विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए समावेशी पद्धतियाँ अपनाने हेतु प्रेरित किया।


    राजभाषा अधिनियम पर CPD कार्यशाला

    विषय: राजभाषा अधिनियम

    “राजभाषा अधिनियम” विषय पर एक सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशाला 22 अप्रैल 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सत्र का संचालन श्री मनोज पारीक, TGT संस्कृत द्वारा किया गया।

    राजभाषा अधिनियम पर CPD कार्यशाला

    कार्यशाला के उद्देश्य

    • शिक्षकों और कर्मचारियों को राजभाषा अधिनियम एवं संबंधित नियमों के प्रावधानों से परिचित कराना।
    • आधिकारिक एवं प्रशासनिक कार्य में हिंदी के प्रभावी प्रयोग को बढ़ावा देना।
    • भारत सरकार की राजभाषा नीति के कार्यान्वयन के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।
    • हिंदी के प्रचार-प्रसार में कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    श्री मनोज पारीक ने राजभाषा अधिनियम, 1963 की प्रमुख विशेषताओं तथा संघ की राजभाषा के रूप में हिंदी के प्रयोग से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी दी। आधिकारिक पत्राचार और प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया।

    संसाधन व्यक्ति ने राजभाषा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए भारत सरकार द्वारा किए गए विभिन्न दिशा-निर्देशों और पहलों की जानकारी दी। कार्यालयी टिप्पण, प्रारूपण, पत्राचार तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर दिया गया।

    सहभागिता एवं संवाद

    शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की। संवाद और प्रश्नोत्तर के माध्यम से प्रतिभागियों ने राजभाषा अधिनियम के व्यावहारिक अनुप्रयोगों से संबंधित शंकाओं का समाधान प्राप्त किया।

    कार्यशाला का परिणाम

    • राजभाषा अधिनियम और संबंधित नियमों की समझ बढ़ी।
    • आधिकारिक एवं प्रशासनिक कार्य में हिंदी के प्रयोग के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • दैनिक कार्य में हिंदी के प्रयोग और प्रचार के लिए प्रेरणा मिली।
    • राजभाषा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन के प्रति प्रतिबद्धता सुदृढ़ हुई।

    निष्कर्ष

    यह CPD कार्यशाला अत्यंत उपयोगी रही। इसने राजभाषा अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी तथा सरकारी नीतियों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप आधिकारिक कार्य में हिंदी को बढ़ावा देने के महत्त्व को रेखांकित किया।


    सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम पर CPD कार्यशाला

    विषय: सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम

    “सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम” विषय पर एक सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशाला 21 अप्रैल 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सत्र का संचालन श्री गिरिराज वर्मा, TGT सामाजिक विज्ञान द्वारा किया गया।

    सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम पर CPD कार्यशाला

    कार्यशाला के उद्देश्य

    • कर्मचारियों को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के प्रावधानों और महत्त्व से परिचित कराना।
    • RTI अधिनियम के अंतर्गत लोक प्राधिकरणों के अधिकारों और उत्तरदायित्वों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।
    • लोक प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की समझ बढ़ाना।
    • RTI के अंतर्गत सूचना माँगने और उपलब्ध कराने की प्रक्रिया स्पष्ट करना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    श्री गिरिराज वर्मा ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के उद्देश्यों और प्रमुख विशेषताओं की जानकारी दी। पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सहभागिता के माध्यम से लोकतांत्रिक शासन और प्रभावी सार्वजनिक सेवा वितरण को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।

    सत्र में RTI आवेदन की प्रक्रिया, लोक सूचना अधिकारियों (PIO) की भूमिकाएँ, सूचना देने की समय-सीमा, अधिनियम के अंतर्गत अपवाद और अपीलीय तंत्र पर चर्चा की गई। अभिलेखों के उचित रखरखाव और सूचना के समयबद्ध प्रसार के महत्त्व पर भी जोर दिया गया।

    सहभागिता एवं संवाद

    शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रतिभागियों ने RTI आवेदन, अपवादों और संस्थागत उत्तरदायित्वों से संबंधित व्यावहारिक प्रश्न पूछे और चर्चा में भाग लिया।

    कार्यशाला का परिणाम

    • RTI अधिनियम के प्रावधानों और महत्त्व की समझ बढ़ी।
    • सार्वजनिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • अधिनियम के अंतर्गत सूचना माँगने और उपलब्ध कराने की प्रक्रियाएँ स्पष्ट हुईं।
    • पारदर्शी और उत्तरदायी प्रशासन के सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिला।

    निष्कर्ष

    यह CPD कार्यशाला अत्यंत उपयोगी रही। इसने सूचना का अधिकार अधिनियम की जानकारी दी तथा शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी अभिलेख प्रबंधन के महत्त्व को रेखांकित किया।


    POCSO अधिनियम और POSH पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

    दिनांक: 20 अप्रैल 2026

    संसाधन व्यक्ति: श्री रवि शंकर यादव, प्रभारी प्राचार्य

    “बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण (POCSO) अधिनियम एवं लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम (POSH)” विषय पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम 20 अप्रैल 2026 को पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नारायणपुर में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। सत्र का संचालन श्री रवि शंकर यादव, प्रभारी प्राचार्य द्वारा किया गया।

    POCSO अधिनियम और POSH पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

    प्रशिक्षण के उद्देश्य

    • कर्मचारियों में बाल संरक्षण कानूनों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।
    • कर्मचारियों को POCSO अधिनियम के प्रावधानों से परिचित कराना।
    • कार्यस्थल नैतिकता और POSH दिशा-निर्देशों के प्रति संवेदनशील बनाना।
    • विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित, संरक्षित और समावेशी वातावरण को बढ़ावा देना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    श्री रवि शंकर यादव ने POCSO अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देते हुए बच्चों के अधिकारों, अनिवार्य रिपोर्टिंग प्रक्रिया और शिक्षकों तथा कर्मचारियों की जिम्मेदारियों पर जोर दिया।

    सत्र में POSH अधिनियम के प्रावधानों, कार्यस्थल नैतिकता, व्यावसायिक आचरण, शिकायत निवारण तंत्र तथा लैंगिक उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों के निस्तारण में आंतरिक समिति की भूमिका पर चर्चा की गई।

    सहभागिता एवं संवाद

    सभी कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की। संवाद और प्रश्नोत्तर के माध्यम से प्रतिभागियों ने कानूनी प्रावधानों और संस्थागत उत्तरदायित्वों से संबंधित शंकाओं का समाधान किया।

    प्रशिक्षण का परिणाम

    • बाल संरक्षण और कार्यस्थल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • POCSO और POSH अधिनियमों के अंतर्गत कानूनी उत्तरदायित्वों की समझ बढ़ी।
    • सुरक्षित और सहयोगी विद्यालय वातावरण बनाने की प्रतिबद्धता सुदृढ़ हुई।
    • रिपोर्टिंग तंत्र और शिकायत निवारण प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता बढ़ी।

    निष्कर्ष

    यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत उपयोगी रहा। इसने विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा, गरिमा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया तथा सुरक्षित और समावेशी शैक्षिक वातावरण बनाए रखने के महत्त्व को रेखांकित किया।


    समावेशी शिक्षा और समावेशी कक्षा निर्माण पर CPD कार्यशाला

    विषय: समावेशी शिक्षा एवं समावेशी कक्षा का निर्माण

    “समावेशी शिक्षा एवं समावेशी कक्षा का निर्माण” विषय पर एक सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशाला 17 अप्रैल 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सत्र का संचालन श्री मुजफ्फरुद्दीन, PRT द्वारा किया गया।

    समावेशी शिक्षा और समावेशी कक्षा निर्माण पर CPD कार्यशाला

    कार्यशाला के उद्देश्य

    • शिक्षकों को समावेशी शिक्षा के सिद्धांतों और महत्त्व के प्रति संवेदनशील बनाना।
    • समावेशी कक्षा बनाने की रणनीतियों की समझ विकसित करना।
    • CwSN सहित सभी विद्यार्थियों के लिए समान अधिगम अवसरों को बढ़ावा देना।
    • विविध अधिगम आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रभावी शिक्षणशास्त्रीय पद्धतियाँ उपलब्ध कराना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    श्री मुजफ्फरुद्दीन ने NEP 2020 के संदर्भ में समावेशी शिक्षा की अवधारणा और महत्त्व समझाया। प्रत्येक बच्चे की क्षमता, पृष्ठभूमि या अधिगम आवश्यकता की परवाह किए बिना समान अधिगम अवसर देने पर जोर दिया गया।

    विभेदित शिक्षण, लचीली शिक्षण पद्धतियों, सहायक प्रौद्योगिकी और अनुकूलित शिक्षण-अधिगम सामग्री के उपयोग से समावेशी कक्षा बनाने की रणनीतियों पर चर्चा की गई। सहानुभूति, संवेदनशीलता और सकारात्मक कक्षा संस्कृति के महत्त्व पर भी जोर दिया गया।

    सहभागिता एवं संवाद

    शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की। संवाद और अनुभव-साझाकरण के माध्यम से समावेशी शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों और श्रेष्ठ प्रथाओं पर चर्चा हुई। बाधारहित और सहयोगी अधिगम वातावरण बनाने पर विचार किया गया।

    कार्यशाला का परिणाम

    • समावेशी शिक्षा के सिद्धांतों और व्यवहार की समझ बढ़ी।
    • विविध शिक्षार्थियों और CwSN की आवश्यकताओं के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • समावेशी शिक्षणशास्त्रीय रणनीतियों को अपनाने की क्षमता सुदृढ़ हुई।
    • सहायक, समानतापूर्ण और शिक्षार्थी-अनुकूल कक्षाएँ बनाने के लिए प्रोत्साहन मिला।

    निष्कर्ष

    यह CPD कार्यशाला अत्यंत उपयोगी रही। इसने सभी शिक्षार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुँच सुनिश्चित करने में समावेशी शिक्षा के महत्त्व को रेखांकित किया और कक्षा में समावेशी पद्धतियाँ अपनाने के लिए प्रेरित किया।


    छुट्टी नियमों पर CPD कार्यशाला

    विषय: छुट्टी नियम

    “छुट्टी नियम” विषय पर एक सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशाला 18 अप्रैल 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सत्र का संचालन श्री अजय कुमार मीना, PRT द्वारा किया गया।

    छुट्टी नियमों पर CPD कार्यशाला

    कार्यशाला के उद्देश्य

    • केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए स्वीकार्य विभिन्न प्रकार की छुट्टियों से कर्मचारियों को परिचित कराना।
    • विभिन्न छुट्टियों की पात्रता, प्रक्रिया और शर्तों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।
    • छुट्टी आवेदन प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों को स्पष्ट करना।
    • सरकारी छुट्टी नियमों और विनियमों की उचित समझ और अनुपालन सुनिश्चित करना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    श्री अजय कुमार मीना ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों पर लागू विभिन्न छुट्टी प्रावधानों की जानकारी दी, जिनमें आकस्मिक अवकाश (CL), अर्जित अवकाश (EL), अर्ध-वेतन अवकाश (HPL), बाल देखभाल अवकाश (CCL), मातृत्व अवकाश, पितृत्व अवकाश, परिवर्तित अवकाश, असाधारण अवकाश (EOL) और अन्य विशेष अवकाश शामिल हैं।

    पात्रता शर्तों, संचय एवं नकदीकरण, अवकाश स्वीकृत करने वाले अधिकारियों तथा विभिन्न प्रकार की छुट्टियों के आवेदन की प्रक्रिया समझाई गई। उचित अभिलेख रखने, समय पर आवेदन देने और सरकारी नियमों के पालन पर जोर दिया गया।

    सहभागिता एवं संवाद

    शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रतिभागियों ने छुट्टी की पात्रता, संचय और स्वीकृति प्रक्रिया से संबंधित प्रश्न पूछे। संवादात्मक चर्चा से छुट्टी प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं पर स्पष्टता मिली।

    कार्यशाला का परिणाम

    • विभिन्न प्रकार की छुट्टियों और उनकी स्वीकार्यता की समझ बढ़ी।
    • छुट्टी प्रक्रिया और दस्तावेजीकरण आवश्यकताओं के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • पात्रता शर्तों और संबंधित प्रावधानों की स्पष्टता बढ़ी।
    • छुट्टी लेते समय सरकारी मानदंडों और प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए प्रोत्साहन मिला।

    निष्कर्ष

    यह CPD कार्यशाला अत्यंत उपयोगी रही। इसने केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों पर लागू छुट्टी नियमों की जानकारी दी और कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार की छुट्टियों के प्रावधानों तथा प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने में सक्षम बनाया।


    NEP 2020 दक्षता-आधारित पाठ योजना की तैयारी पर CPD कार्यशाला

    विषय: NEP 2020 के अंतर्गत दक्षता-आधारित पाठ योजना की तैयारी

    “NEP 2020 के अंतर्गत दक्षता-आधारित पाठ योजना की तैयारी” विषय पर एक सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यशाला 16 अप्रैल 2026 को विद्यालय की कंप्यूटर लैब में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सत्र का संचालन श्री पवन कुमार, PRT द्वारा किया गया।

    NEP 2020 दक्षता-आधारित पाठ योजना की तैयारी पर CPD कार्यशाला

    कार्यशाला के उद्देश्य

    • NEP 2020 में परिकल्पित दक्षता-आधारित शिक्षा की अवधारणा और महत्त्व से शिक्षकों को परिचित कराना।
    • दक्षता-आधारित पाठ योजना के घटकों की समझ विकसित करना।
    • शिक्षार्थी-केंद्रित और परिणाम-उन्मुख पाठ योजनाएँ तैयार करने की रणनीतियाँ प्रदान करना।
    • कक्षा शिक्षण में अनुभवात्मक, गतिविधि-आधारित और दक्षता-केंद्रित शिक्षणशास्त्र को बढ़ावा देना।

    सत्र की प्रमुख विशेषताएँ

    श्री पवन कुमार ने दक्षता-आधारित शिक्षा के प्रमुख सिद्धांतों की जानकारी दी और NEP 2020 के अनुरूप विषयवस्तु-आधारित शिक्षण से परिणाम-आधारित अधिगम की ओर परिवर्तन पर जोर दिया। पाठ योजना में अधिगम परिणाम, दक्षताओं और विद्यार्थी सहभागिता पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।

    संसाधन व्यक्ति ने अधिगम उद्देश्यों, अनुभवात्मक गतिविधियों, प्रारूपिक मूल्यांकन और चिंतनात्मक अभ्यासों को शामिल करते हुए दक्षता-आधारित पाठ योजना तैयार करने की प्रक्रिया प्रदर्शित की। पूछताछ-आधारित, सहयोगात्मक और अनुभवात्मक अधिगम जैसी पद्धतियों पर भी चर्चा की गई।

    सहभागिता एवं संवाद

    शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों ने दक्षता-आधारित पाठ योजना तैयार करने से संबंधित व्यावहारिक अभ्यास किए, अनुभव साझा किए और कक्षा शिक्षण को अधिक संवादात्मक एवं प्रभावी बनाने के नवीन उपायों पर चर्चा की।

    कार्यशाला का परिणाम

    • दक्षता-आधारित शिक्षा और NEP 2020 में इसके महत्त्व की समझ बढ़ी।
    • दक्षता-आधारित पाठ योजनाएँ तैयार करने की शिक्षकों की क्षमता में सुधार हुआ।
    • शिक्षार्थी-केंद्रित और अनुभवात्मक शिक्षण पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ी।
    • विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों में सुधार के लिए नवीन शिक्षणशास्त्रीय पद्धतियाँ अपनाने की प्रेरणा मिली।

    निष्कर्ष

    यह CPD कार्यशाला अत्यंत उपयोगी रही। इसने दक्षता-आधारित पाठ योजनाओं की तैयारी पर उपयोगी जानकारी दी और NEP 2020 की दृष्टि के अनुरूप परिणाम-उन्मुख तथा शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों को अपनाने के महत्त्व को रेखांकित किया।