उद् भव
पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नारायणपुर की स्थापना 18 अगस्त 2015 को सिविल सेक्टर विद्यालय के रूप में की गई थी। यह विद्यालय केन्द्रीय विद्यालय संगठन के अधीन संचालित होता है। विद्यालय में बालवाटिका से कक्षा बारहवीं तक (विज्ञान एवं कला संकाय) सह-शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत शिक्षा प्रदान की जाती है।
विद्यालय का मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास को सुनिश्चित करना है। यह विद्यालय विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक मूल्यों तथा “भारतीयता” की भावना को सुदृढ़ करने हेतु निरंतर प्रयासरत है, जिससे वे जिम्मेदार एवं आत्मविश्वासी नागरिक बन सकें।
यह विद्यालय नारायणपुर नगर से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर, प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण शांत वातावरण में स्थित है। चारों ओर हरियाली, पर्वत एवं वृक्षों से घिरा यह परिसर अध्ययन-अध्यापन के लिए अत्यंत अनुकूल एवं प्रेरणादायी वातावरण प्रदान करता है।
पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नारायणपुर 21वीं सदी की शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक आधारभूत संरचना एवं नवीनतम तकनीकों से सुसज्जित है। स्मार्ट कक्षाएं, सुदृढ़ खेल सुविधाएं तथा सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों (CCA) के लिए आवश्यक अधोसंरचना विद्यार्थियों के समग्र विकास को सुनिश्चित करती हैं।
यह विद्यालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध एक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (कक्षा XI–XII) है। विद्यालय में बालवाटिका से कक्षा बारहवीं तक विज्ञान एवं कला संकाय के साथ एकीकृत CBSE पाठ्यक्रम का पालन किया जाता है।
विद्यालय विद्यार्थियों को एक समग्र एवं समावेशी शैक्षिक वातावरण प्रदान करता है, जिससे प्रत्येक बालक का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। सुनियोजित शैक्षणिक ढांचा एवं प्रभावी शिक्षण पद्धतियाँ विद्यार्थियों को न केवल अकादमिक रूप से सशक्त बनाती हैं, बल्कि ओलंपियाड, JEE, NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भी प्रेरित करती हैं।
विद्यालय का यह विश्वास है कि शिक्षा केवल वर्तमान तक सीमित न होकर जीवनभर सीखने की प्रक्रिया है। विद्यार्थियों को रचनात्मक, आत्मविश्वासी, लचीले एवं आलोचनात्मक चिंतनशील व्यक्तित्व के रूप में विकसित करने हेतु प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि वे निरंतर बदलती वैश्विक परिस्थितियों में सफलतापूर्वक स्वयं को स्थापित कर सकें। विद्यालय की शैक्षिक दर्शन प्रणाली प्रौद्योगिकी के समुचित उपयोग तथा पाठ्यपुस्तकों से आगे वास्तविक जीवन से जुड़ी सीख को महत्व देती है।
बालवाटिका:
प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा कार्यक्रम छोटे बच्चों की आवश्यकताओं, रुचियों एवं क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। यह पाठ्यक्रम निर्माणवादी शिक्षण सिद्धांत (Constructivism) तथा बहु-बुद्धि सिद्धांत (Multiple Intelligences) से प्रेरित है, जिससे बच्चों में आनंददायक, अनुभवात्मक एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण को बढ़ावा मिलता है।
प्राथमिक अनुभाग:
प्राथमिक पाठ्यक्रम CBSE की संस्तुतियों के अनुरूप है, जिसमें शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का समुचित समन्वय किया गया है। यह पाठ्यक्रम जिज्ञासा, सृजनशीलता एवं सीखने के प्रति रुचि विकसित करता है तथा वर्तमान एवं भविष्य की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करता है।
माध्यमिक अनुभाग:
माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थी प्राथमिक कक्षाओं में अर्जित मूलभूत ज्ञान के आधार पर विषयों की गहन समझ विकसित करते हैं। इस स्तर का पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक सोच, विषयगत दक्षता तथा वास्तविक जीवन से ज्ञान को जोड़ने की क्षमता विकसित करता है।
शैक्षिक वातावरण:
विद्यालय एक ऐसा सशक्त शिक्षण वातावरण प्रदान करता है, जहाँ 21वीं सदी के कौशल, खेल, संगीत एवं कला को अकादमिक शिक्षा के साथ समान महत्व दिया जाता है। भाषा प्रयोगशाला, कंप्यूटर प्रयोगशाला, खेल अधोसंरचना एवं सुसज्जित CCA सुविधाएँ बौद्धिक, शारीरिक, कलात्मक एवं भावनात्मक विकास को सुदृढ़ करती हैं तथा आजीवन सीखने की संस्कृति को प्रोत्साहित करती हैं।